जम्मू कश्मीर के जम्मू हिस्से को विदेशियों के लिए रेफ्यूजी कैप्म मत बनायो। ज्ञात रहे कि इस क्षेत्र में पहले से ही बांग्लादेशी वर्मा नेपाल इत्यादि बाहरी देशों के नागरिक कई वर्षों से रह रहे हैं ऊपर से रोहिंग्या मुस्लिम लोगों को भी कुछ नेता केवल धर्म की आड़ लेकर जम्मू में बसाने की कोशिश में है जो हानिकारक है ज्ञात रहे की इन मुस्लिम लोगों को वही बताना चाहते हैं जिनकी गतिविधियां पहले ही देश विरोधी रही हैं
नगरपालिका की नाकामी के कारण बढ़ रहे हैं डेंगू के मामले जम्मू(राजेंद्र भगत) पिछले कुछ वर्षों में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी होती जा रही है हालांकि जिस प्रकार से स्वास्थ्य विभाग और जनता डेंगू के नाम से जागरुक हुई है उस कारण इन मामलों में कमी आनी चाहिए थी। पर हो इस से उलट रहा है। अगर राज्य स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी को कवर करने के लिए सारी टीमें बनाई है तो बीमारी पर काबू पाया जाना चाहिए था पर ऐसा क्यों नहीं हो पा पाया? क्या डेंगू पर काबू पाना केवल स्वास्थ्य विभाग का ही कार्य है ? अगर मच्छर के या गंदगी के कारण डेंगू फैलता है तो क्या स्वास्थ्य विभाग को डेंगू पर काबू ना कर पाने का दोषी मानना सही है? *नगरपालिका का काम क्या होता है* पूरे देश के अंदर डेंगू से मुकाबला करने के लिए उस राज्य की नगरपालिका काम करती है। जिस सीजन में डेंगू फैलता है उस सीजन में गड्ढे भरना, पानी का जमावड़ा, गंदगी के ढेर, मच्छर मारने वाली दुआ गाड़ियां, लोगों को डेंगू के प्रति अवेरनेस कैम्प इत्यादि नगर पालिका लगती है। तो क्या जम्मू में इस तरह की कोई मुहिम चलाई गई है? नहीं तो क्यों? हां तो कब? जम्म...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें