नगरपालिका की नाकामी के कारण बढ़ रहे हैं डेंगू के मामले

जम्मू(राजेंद्र भगत)
पिछले कुछ वर्षों में डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी होती जा रही है हालांकि जिस प्रकार से स्वास्थ्य विभाग और जनता डेंगू के नाम से जागरुक हुई है उस कारण इन मामलों में कमी आनी चाहिए थी। पर हो इस से उलट रहा है। अगर राज्य स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी को कवर करने के लिए सारी टीमें बनाई है तो बीमारी पर काबू पाया जाना चाहिए था पर ऐसा क्यों नहीं हो पा पाया?
क्या डेंगू पर काबू पाना केवल स्वास्थ्य विभाग का ही कार्य है ? अगर मच्छर के या गंदगी के कारण डेंगू फैलता है तो क्या स्वास्थ्य विभाग को डेंगू पर काबू ना कर पाने का दोषी मानना सही है?

*नगरपालिका का काम क्या होता है*
    पूरे देश के अंदर डेंगू से मुकाबला करने के लिए उस राज्य की नगरपालिका काम करती है। जिस सीजन में डेंगू फैलता है उस सीजन में गड्ढे भरना, पानी का जमावड़ा, गंदगी के ढेर, मच्छर मारने वाली दुआ गाड़ियां, लोगों को डेंगू के प्रति अवेरनेस कैम्प इत्यादि नगर पालिका लगती है। तो क्या जम्मू में इस तरह की कोई मुहिम चलाई गई है? नहीं तो क्यों? हां तो कब? जम्मू नगर पालिका जिसके पास पूरा जम्मू शहर है कितनी गाड़ियां है दुआ करने वाली? क्या शहरवासियों ने कभी मच्छर मारने वाली टीम को अपने इलाके में देखा है? नगरपालिका ने डेंगू से बचाव के लिए कितने और कब अवेयरनेस कैंप लगाए? कितने स्कूलों में बच्चों को डेंगू के प्रति अवेयरनेस किया?
 यह केवल शहर की बात है गांव में जहां से डेंगू के मामले सबसे अधिक आते हैं उन्हें जागृत करने के लिए क्या किया?
*अब बात करते हैं स्वास्थ विभाग की*
स्वास्थ्य विभाग में जम्मू के दो अस्पताल के डेंगू वार्ड तो मरीजों से भरे पडे हैं और मरीजों के लिए जगह नहीं है। अगर यह बीमारी इतनी घातक है तो विभाग इस बीमारी की तैयारी बड़े स्तर पर क्यों नहीं करता? मरीजों को केवल शहर के मेडिकल कॉलेज में रैफर कर देने से क्या विभाग की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है? जम्मू का जनरल मेडिकल कॉलेज अर्थात जहां मेडिकल स्टूडेंट को डॉक्टर बनने के पढ़ाया, लिखाया और डॉक्टर बनाना और मरीजों का इलाज किया जाता है। इस बीमारी में सीखने, पढ़ने या डॉक्टर बनाने से बेहतर होता कि विभाग इस डेंगू बीमारी की गंभीरता को समझते हुए सीधे इलाज पर ध्यान केंद्रित करता।
 ज्ञात रहे कि जम्मू के मेडिकल कॉलेज और गांधीनगर अस्पतालों में डेंगू वार्ड मरीजों से भरे हैं और डेंगू अभी भी प्रचंड रुप में है केवल डॉक्टर पर दबाव बनाकर डेंगू को समाप्त नहीं किया जा सकता स्वास्थ्य विभाग इस से लड़ने के संसाधन जुटाए और नगर पालिका अपने सरकारी कार्यालयों से बाहर निकले और मच्छरों की रोकथाम के लिए कार्य करें तो ही डेंगू पर काबू किया जा सकता है।
राजेंद्र भगत
चीफ व्यूरो पी.के.एस. न्यूज़
जम्मू कश्मीर
नगर पालिका की नाकामी से डेंगू के मरीज बढ रहे http://www.pksnews24.com/archives/14780

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